जहां कहीं भी जाएंगे जहरीली हवा ही पाएंगे !
दिवाली को बीते हुए लगभग 1 हफ्ते से भी ज्यादा का समय हो गया है। मगर 1 सप्ताह बीत जाने के बाद भी देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रहने वाले लोग सांस लेने के लिए शुद्ध हवा को तरस गए हैं। दिल्ली में प्रदूषण का स्तर इतना खतरनाक लेवल पर पहुंच गया है कि 1 हफ्तों से दिल्ली में केवल धुंध ही छाई हुई है।
यह हाल केवल दिल्ली का ही नहीं है बल्कि दिल्ली से सटे नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुड़गांव में भी प्रदूषण का स्तर खतरनाक है। सोमवार को यह प्रदूषण का स्तर pm10 900 से भी ज्यादा रिकॉर्ड किया गया। दिल्ली वासियों के द्वारा चाय की दुकान से लेकर सोशल मीडिया तक दिल्ली छोड़ने की चर्चा की जा रही है। मगर प्रश्न यह है कि जाएं कहां! क्योंकि जहां भी जाएंगे केवल जहरीली हवा ही पाएंगे।
जहरीली हवा से भरा हुआ है पूरा उत्तर भारत
प्रदूषण का खतरनाक स्तर केवल दिल्ली में ही नहीं है बल्कि पूरा उत्तर भारत इसकी चपेट में है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा 3 नवंबर की शाम को जारी किया गया एयर क्वालिटी इंडेक्स बहुत ही खतरनाक रहा। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने इसे पांच भागों में बांटा है।
0 से 50 – अच्छा
50 से 100 संतोषजनक
100 से 200 ठीक-ठाक
200 से 300 खराब
300 से 400 बहुत खराब
400 से 500 खतरनाक

उत्तर प्रदेश में कानपुर लखनऊ और बनारस का एयर क्वालिटी इंडेक्स 350 से ज्यादा रहा। वहीं पटना का एयर क्वालिटी इंडेक्स 413, आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम का भी एयर क्वालिटी इंडेक्स बहुत खराब रहा। मध्य प्रदेश में इंदौर और पुणे की हवा सांस लेने लायक है। आने जगहों पर जहरीली हवा है।
केजरीवाल ने पराली जलाने वालों पर फोड़ा ठीकरा
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ने का कारण हरियाणा और पंजाब में किसानों द्वारा पराली जलाए जाने को बताया। मगर प्रश्न तब खड़ा हो गया जब पटना का भी प्रदूषण स्तर काफी ज्यादा हो गया। ऐसे में सवाल ये उठने लगा कि पटना में पराली जलाई गयी? सरकार को इस पर गंभीर चिंतन करने की आवश्यकता है कि वास्तव में इस खतरनाक स्तर तक प्रदूषण बढ़ने का कारण क्या है।
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